
लखनऊ के ठाकुरगंज थाना परिसर में खड़ी एक SUV की नंबर प्लेट को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है। तस्वीरों में दिख रहा है कि वाहन पर पुरानी शैली की नंबर प्लेट लगी हुई है, जबकि प्रदेश में HSRP (High Security Registration Plate) अनिवार्य है।
कार के शीशे पर “Police” भी लिखा दिखाई देता है, जिससे मामला और दिलचस्प हो गया है।
HSRP नियम और जमीनी हकीकत
उत्तर प्रदेश में HSRP लागू होने के बाद पुरानी नंबर प्लेट पर चालान की कार्रवाई आम है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है अगर आम नागरिकों पर चालान हो रहा है, तो थाना परिसर में खड़े वाहन पर नियम कैसे लागू होंगे? “कानून की गाड़ी तेज चलती है, पर क्या कभी खुद पर ब्रेक लगाती है?”


क्या होगी कार्रवाई?
नजर इस बात पर है कि क्या यह मामला भी अन्य चालानों की तरह नियमों के दायरे में आएगा।
Bigger Question: Rule of Law
क्या HSRP नियम सार्वभौमिक रूप से लागू हो रहे हैं? क्या सरकारी परिसरों में खड़े वाहनों की भी समान जांच होती है? Transparency और accountability का स्तर क्या है? लोकतंत्र में सबसे बड़ा भरोसा “Equal Law Enforcement” पर टिका होता है।
फिलहाल मामला सार्वजनिक चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासन की ओर से यदि स्पष्टीकरण आता है, तो तस्वीर और साफ होगी। पर एक सवाल हवा में तैर रहा है नियम अगर सबके लिए हैं, तो लागू भी सब पर होने चाहिए।
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